रायतु भरोसा (पहले रायतु बंधु योजना)
तेलंगाना के किसानों को हर एकड़ पर साल में ₹12,000 — रायतु बंधु योजना अब रायतु भरोसा योजना है।
मुख्य लाभ · Main Benefit
₹12,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष — खरीफ़ में ₹6,000 और रबी में ₹6,000, सीधे किसान के बैंक खाते में।
रायतु भरोसा (Rythu Bharosa) तेलंगाना सरकार की किसान निवेश-सहायता योजना है। इसकी शुरुआत 2018 में रायतु बंधु योजना के नाम से हुई थी — देश की पहली ऐसी योजनाओं में से एक, जिसमें सरकार ने किसान को क़र्ज़ या सब्सिडी के बजाय सीधे खेती में लगाने के लिए पैसा दिया।
राशि हर फ़सल चक्र की शुरुआत में दी जाती है, ताकि आप बीज, खाद और कीटनाशक ख़रीद सकें और मज़दूरी का ख़र्च उठा सकें। इसीलिए यह पैसा साल में एक बार नहीं, बल्कि हर सीज़न आता है — ठीक उस वक़्त जब ज़रूरत सबसे ज़्यादा होती है। मक़सद यही है कि बुवाई के मौक़े पर किसान को साहूकार के पास न जाना पड़े।
यह सिर्फ़ नाम का बदलाव नहीं है — रक़म भी बढ़ी है।
| रायतु बंधु (2018 से) | रायतु भरोसा (अभी) | |
|---|---|---|
| प्रति सीज़न | ₹5,000 प्रति एकड़ | ₹6,000 प्रति एकड़ |
| प्रति वर्ष | ₹10,000 प्रति एकड़ | ₹12,000 प्रति एकड़ |
यह बदलाव GO Rt No. 18, दिनांक 10 जनवरी 2025 के तहत हुआ और 26 जनवरी 2025 से लागू है।
पात्रता राज्य के भू-अभिलेख से तय होती है, और उसका आधार आपकी पट्टादार पासबुक है। सहायता ज़मीन के रकबे के हिसाब से मिलती है — जितनी एकड़ ज़मीन आपके नाम दर्ज है, उतना पैसा।
इसका दूसरा पहलू यह है कि जिनके नाम पर ज़मीन दर्ज नहीं है — यानी बटाईदार और किराए पर खेती करने वाले किसान — उन्हें इस योजना का पैसा नहीं मिलता, भले ही खेती असल में वही करते हों।
कौन ले सकता है फ़ायदा:
पात्र नहीं हैं:
ध्यान दें:
प्रक्रिया:
पट्टादार पासबुक ही इस योजना की चाबी है। ज़मीन के रिकॉर्ड में कोई दिक़्क़त हो तो सबसे पहले उसे ठीक कराएँ — बाक़ी सब उसी पर टिका है।
रायतु बंधु की जगह अब रायतु भरोसा योजना चलती है। GO Rt No. 18 दिनांक 10 जनवरी 2025 के तहत नाम बदला गया और यह 26 जनवरी 2025 से लागू है। किसानों को मिलने वाली मदद बंद नहीं हुई, बल्कि बढ़ गई है।
प्रति एकड़ ₹12,000 सालाना मिलते हैं — खरीफ़ सीज़न में ₹6,000 और रबी सीज़न में ₹6,000। रायतु बंधु में यह प्रति सीज़न ₹5,000 यानी साल में ₹10,000 प्रति एकड़ था, जिसे बढ़ाया गया है।
नहीं। यह योजना सिर्फ़ उन किसानों के लिए है जिनके नाम पर ज़मीन दर्ज है और जिनके पास वैध पट्टादार पासबुक है। जो खेती तो करते हैं पर ज़मीन उनके नाम नहीं है, उन्हें यह पैसा नहीं मिलता।
आमतौर पर नहीं। पात्रता राज्य के भू-अभिलेख से अपने-आप तय होती है। बस पट्टादार पासबुक और बैंक खाते की जानकारी सही और अद्यतन रखें।
साल में दो बार — खरीफ़ और रबी, दोनों सीज़न के लिए ₹6,000 प्रति एकड़। पैसा फ़सल चक्र की शुरुआत में दिया जाता है, ताकि बीज, खाद और मज़दूरी का ख़र्च उसी वक़्त निकल सके।
पहले भू-अभिलेख में अपना नाम, रक़बा और बैंक खाता जाँचें। फिर rythubharosa.telangana.gov.in पर स्थिति देखें, और ज़रूरत हो तो नज़दीकी कृषि या राजस्व कार्यालय में संपर्क करें।
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