रबी MSP 2027-28: गेहूं, चना, सरसों समेत 6 फसलों के नए दाम, पूरी लिस्ट
Rabi MSP 2027-28: Crop-wise Minimum Support Prices and How Procurement Works

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए 6 रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ा दिया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने यह मंज़ूरी 30 सितंबर 2026 को दी। इसके बाद 29 अक्टूबर 2026 को PIB ने एक व्याख्यात्मक नोट (explainer) जारी किया, जिसमें खरीद से जुड़ी और जानकारी दी गई।
ध्यान दें, 29 अक्टूबर का नोट कोई नई मंज़ूरी नहीं है। उसमें 30 सितंबर के फैसले को ही विस्तार से समझाया गया है। PIB के इस नोट के अनुसार, रबी विपणन सीजन 2027-28 में 324 लाख मीट्रिक टन उपज के लिए किसानों को लगभग ₹90,962 करोड़ का भुगतान होने का अनुमान है।
रबी MSP 2027-28: पूरी लिस्ट
नीचे दी गई सभी दरें PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से ली गई हैं। सभी दाम रुपये प्रति क्विंटल में हैं।
| फसल | MSP 2027-28 (₹/क्विंटल) | MSP 2026-27 | बढ़ोतरी | लागत पर मार्जिन |
|---|---|---|---|---|
| गेहूं | ₹2,610 | ₹2,585 | ₹25 | 106% |
| जौ | ₹2,286 | ₹2,150 | ₹136 | 58% |
| चना | ₹5,958 | ₹5,875 | ₹83 | 59% |
| मसूर | ₹7,390 | ₹7,000 | ₹390 | 92% |
| रेपसीड और सरसों | ₹6,613 | ₹6,200 | ₹413 | 96% |
| कुसुम | ₹7,215 | ₹6,540 | ₹675 | 50% |
"लागत पर मार्जिन" का मतलब है अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर अनुमानित मार्जिन। PIB के 29 अक्टूबर 2026 के नोट में 2027-28 की उत्पादन लागत प्रति क्विंटल दी गई है: गेहूं ₹1,264, जौ ₹1,447, चना ₹3,751। मसूर की लागत ₹3,854, रेपसीड और सरसों की ₹3,367 और कुसुम की ₹4,810 प्रति क्विंटल है। PIB के अनुसार इस लागत में बीज, खाद, मज़दूरी, सिंचाई, किराये की ज़मीन, डीज़ल या बिजली जैसे सभी नकद खर्च शामिल हैं। इसमें परिवार के श्रम का अनुमानित मूल्य भी जोड़ा गया है।
सबसे ज़्यादा किसकी बढ़ी कीमत
रुपये के हिसाब से सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी कुसुम में हुई है, ₹675 प्रति क्विंटल। इसके बाद रेपसीड और सरसों में ₹413 और मसूर में ₹390 की बढ़ोतरी हुई है। जौ में ₹136, चने में ₹83 और गेहूं में सबसे कम ₹25 की बढ़ोतरी हुई है।
लागत पर मार्जिन के हिसाब से गेहूं सबसे आगे है, 106%। इसके बाद रेपसीड और सरसों 96% और मसूर 92% पर है। PIB के 29 अक्टूबर 2026 के नोट के अनुसार, बढ़े हुए MSP का मकसद किसानों को लाभकारी दाम देना और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है।
MSP का मतलब क्या है
MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह दाम है, जिस पर सरकारी एजेंसियां तय फसलें किसानों से खरीदती हैं। PIB के 29 अक्टूबर 2026 के नोट के अनुसार, बाज़ार भाव कम होने पर MSP पर खरीद से किसान अपनी योग्य उपज घोषित दाम पर बेच सकता है।
सरकार हर साल 22 अनिवार्य फसलों का MSP घोषित करती है। यह कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों पर तय होता है, जिसमें राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों की राय भी ली जाती है। PIB के अनुसार CACP उत्पादन लागत, देश और दुनिया में मांग और आपूर्ति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दाम देखता है। साथ ही वह फसलों के बीच दामों का संतुलन, खेती और गैर-खेती क्षेत्र के बीच व्यापार की शर्तें, अर्थव्यवस्था पर असर और लागत पर कम से कम 50% मार्जिन को भी ध्यान में रखता है।
केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुसार MSP कम से कम उत्पादन लागत का 1.5 गुना रखा जाता है। यानी लागत पर कम से कम 50% मार्जिन। रबी 2027-28 में कुसुम का मार्जिन ठीक 50% है, बाकी फसलों का इससे ज़्यादा।
MSP पर फसल कैसे बिकती है
MSP की घोषणा का मतलब यह नहीं है कि हर किसान को अपने आप MSP मिल जाएगा। MSP पर बिक्री सरकारी खरीद की प्रक्रिया से होती है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन, तय खरीद केंद्र, तय समय और फसल की गुणवत्ता, सब ज़रूरी हैं।
गेहूं और जौ (अनाज और मोटे अनाज): PIB के अनुसार अनाज और मोटे अनाज की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य की नामित एजेंसियां करती हैं। किसानों का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन पोर्टल पर होता है। तय समय में लाई गई और तय गुणवत्ता वाली उपज MSP पर खरीदी जाती है। खरीद केंद्रों की जगह और संख्या राज्य सरकार तय करती है या उसकी सलाह से तय होती है।
चना, मसूर, सरसों और कुसुम (दलहन और तिलहन): इनकी खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) की मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत होती है। PIB के 29 अक्टूबर 2026 के नोट के अनुसार PM-AASHA सितंबर 2018 में शुरू हुआ था। यह योजना राज्य सरकार के अनुरोध पर लागू होती है, जब बाज़ार भाव MSP से नीचे चला जाए। खरीद मुख्य रूप से NAFED और NCCF करती हैं।
PSS में खरीद सिर्फ पहले से रजिस्टर्ड किसानों से होती है, जिनके पास वैध भूमि रिकॉर्ड हों। उपज का उचित औसत गुणवत्ता (FAQ) मानक पर खरा उतरना ज़रूरी है। रजिस्ट्रेशन में आधार, भूमि रिकॉर्ड, बैंक खाते और फसल की जानकारी देनी होती है।
PIB के अनुसार 2025-26 सीजन से PSS में खरीद से पहले किसान का बायोमेट्रिक सत्यापन ज़रूरी है। यह आधार आधारित PoS मशीन या चेहरे की पहचान से होता है। MSP का पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है।
मसूर के लिए एक खास बात है। दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत 2030-31 तक तुअर, उड़द और मसूर की खरीद पहले से रजिस्टर्ड किसानों से की जाती है। PIB के अनुसार यह खरीद किसान जितनी उपज बेचना चाहें, उतनी तक होती है।
हर राज्य का अपना कार्यक्रम: खरीद कब शुरू होगी, कहां केंद्र खुलेंगे, यह हर राज्य अलग तय करता है। राज्य सरकार और खरीद एजेंसियां खरीद की तारीखें, केंद्रों की जगह और FAQ मानक का प्रचार करती हैं। अगर बाज़ार में MSP से अच्छा दाम मिले, तो किसान कहीं भी अपनी फसल बेच सकते हैं।
किसान क्या करें
- अपने राज्य का खरीद कार्यक्रम देखें: रबी 2027-28 की खरीद तारीखें और केंद्र आपका राज्य घोषित करेगा। राज्य के खाद्य या कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल और नज़दीकी खरीद केंद्र से जानकारी लेते रहें।
- समय पर रजिस्ट्रेशन कराएं: गेहूं के लिए राज्य के खरीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होता है। चना, मसूर, सरसों और कुसुम के लिए PSS में पहले से रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है।
- कागज़ तैयार रखें: आधार, मोबाइल नंबर, भूमि रिकॉर्ड (खसरा, खतौनी आदि), आधार से जुड़ा बैंक खाता और बोई गई फसल की जानकारी पहले से तैयार रखें।
- फसल की गुणवत्ता का ध्यान रखें: उपज साफ, सूखी और FAQ मानक के अनुसार होनी चाहिए। खरीद केंद्र पर लगे गुणवत्ता मानक पहले से पढ़ लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गेहूं का नया MSP कितना है?
रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल है। पिछले सीजन 2026-27 में यह ₹2,585 था। यानी ₹25 की बढ़ोतरी हुई है।
रबी MSP 2027-28 कब मंज़ूर हुआ?
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने इसे 30 सितंबर 2026 को मंज़ूरी दी। 29 अक्टूबर 2026 का PIB नोट सिर्फ व्याख्या है, नई मंज़ूरी नहीं।
सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी किस फसल में हुई?
कुसुम में, ₹675 प्रति क्विंटल। अब कुसुम का MSP ₹7,215 प्रति क्विंटल है। दूसरे नंबर पर रेपसीड और सरसों है, जिसमें ₹413 की बढ़ोतरी हुई।
क्या हर किसान को MSP मिलेगा?
नहीं, अपने आप नहीं। MSP उन्हीं किसानों को मिलता है जो सरकारी खरीद केंद्र पर तय समय में, रजिस्ट्रेशन के साथ और तय गुणवत्ता की उपज बेचते हैं। दलहन और तिलहन की PSS खरीद राज्य के अनुरोध पर ही शुरू होती है।
MSP पर बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कहां होगा?
गेहूं के लिए अपने राज्य के आधिकारिक खरीद पोर्टल या खरीद केंद्र पर। दलहन और तिलहन के लिए NAFED और NCCF के प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन होता है। NCCF का प्लेटफॉर्म ई-संयुक्ति (esamyukti.in) है, जहां रजिस्ट्रेशन मुफ्त है।
रबी 2027-28 में किसानों को कुल कितना भुगतान होने का अनुमान है?
PIB के 29 अक्टूबर 2026 के नोट के अनुसार, 324 लाख मीट्रिक टन उपज के लिए लगभग ₹90,962 करोड़ के भुगतान का अनुमान है। यह एक अनुमान है, पक्की खरीद का आंकड़ा नहीं। इसी नोट के अनुसार छह रबी फसलों की खरीद 2004-05 से 2013-14 के बीच 2,302 लाख मीट्रिक टन थी। 2014-15 से 2025-26 के बीच यह 3,921 लाख मीट्रिक टन रही, और MSP भुगतान ₹2.65 लाख करोड़ से बढ़कर ₹8.36 लाख करोड़ हुआ।
किसी भी फैसले से पहले जानकारी आधिकारिक स्रोत पर ज़रूर जांचें। MSP दरों के लिए PIB (pib.gov.in) देखें और खरीद की तारीखों के लिए अपने राज्य का आधिकारिक खरीद पोर्टल देखें।
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